Chandrayaan 2 Live Updates: ऑर्बिटर ने लगाया ‘विक्रम’ लैंडर का पता, संपर्क साधने की कोशिश जारी

Chandrayaan 2 Moon Landing Live, ISRO Chandrayaan 2 Vikram Lander Location Now Live Updates: गौरतलब है कि इससे पहले इसरो चीफ के सिवन ने कहा था कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर 7 साल तक काम कर सकता है। शिवन ने बताया कि विक्रम लैंडर से दोबारा संपर्क बनाने के लिए प्रयास जारी है। हम इसके लिए लगातार 14 दिन तक प्रयास करेंगे।

Chandrayaan-2 Vikram Lander Location Live Updates: ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ का  चांद पर उतरते समय इसरो से संपर्क टूट गया था लेकिन अब एक बार फिर विक्रम से संपर्क जुड़ने की उम्मीद जग गई है। दरअसल, इसरो प्रमुख के. शिवन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि  विक्रम लैंडर की स्थिति का पता चल गया है। ऑर्बिटर ने थर्मल इमेज कैमरा से उसकी तस्वीर ली है। हालांकि, उससे अभी कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।

गौरतलब है कि इससे पहले इसरो चीफ के सिवन ने कहा था कि  चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर 7 साल तक काम कर सकता है। शिवन  ने बताया कि विक्रम लैंडर से दोबारा संपर्क बनाने के लिए प्रयास जारी है। हम इसके लिए लगातार 14 दिन तक प्रयास करेंगे। सिवान ने कहा कि मिशन के लक्ष्यों को 90 से 95 फीसद तक हासिल किया जा चुका है और लैंडर से संपर्क टूटने के बावजूद इससे चंद्र विज्ञान में योगदान जारी रहेगा।
इन देशों की सूची में शामिल हो जाता भारत

‘विक्रम’ अगर ऐतिहासिक लैंंडिंग में सफल हो जाता तो भारत चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंंडिंग करा चुके अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की कतार में शामिल हो जाता।ऑर्बिटर के चंद्रमा के चारों और अपनी तय कक्षा में स्थापित होने का जिक्र करते हुए इसरो ने कहा, ‘‘यह अपने आठ अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से ध्रुवीय क्षेत्र में खनिजों और जल अणुओं के विकास और मानचित्रण के जरिये चंद्रमा को लेकर हमारी समझ को और समृद्ध करेगा।’’ उसने कहा, ‘‘ऑर्बिटर का कैमरा अब तक किसी भी चंद्र मिशन में इस्तेमाल हुआ सबसे ज्यादा विभेदन (रेजलूशन) वाला कैमरा (0.3एम) है और इससे उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें मिलेंगी जो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिये बेहद उपयोगी होंगी।’’ इसरो ने कहा कि सटीक प्रक्षेपण और मिशन प्रबंधन की वजह से इसका जीवनकाल भी पूर्व नियोजित एक वर्ष के बजाए लगभग सात वर्ष सुनिश्चित है। इसरो के एक अधिकारी ने कहा कि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ठीक है और चंद्रमा की कक्षा में सुरक्षित है।

मिशन के लगभग 95 फीसद लक्ष्य हासिल हुए

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को कहा था कि अब तक चंद्रयान-2 मिशन के लक्ष्यों को 90 से 95 फीसद तक हासिल किया जा चुका है और लैंडर से संपर्क टूटने के बावजूद इससे चंद्र विज्ञान में योगदान जारी रहेगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी कहा कि सटीक प्रक्षेपण और मिशन प्रबंधन से आॅर्बिटर का सात साल लंबा जीवन सुनिश्चित है, जबकि पूर्व में इसके जीवनकाल को एक वर्ष रखने की योजना थी। इसरो ने इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए बताया, ‘‘विक्रम लैंडर ने अपनी 35 किलोमीटर की कक्षा से सतह से ठीक दो किलोमीटर नीचे उतरने में प्रक्षेपण का तय योजना के मुताबिक पालन किया। इस बिंदु तक उसकी सभी प्रणालियां और तंत्र ठीक काम कर रहे थे और इससे लैंडर में इस्तेमाल वेरियेबल थ्रस्ट प्रोपल्शन तकनीक समेत कई नई तकनीकें साबित हुईं।’’इसमें कहा गया कि सफलता का पैमाना मिशन के हर चरण के लिये परिभाषित था और अब तक मिशन के 90 से 95 फीसद लक्ष्य हासिल कर लिये गए हैं और ये चंद्र विज्ञान के क्षेत्र में योगदान जारी रखेंगे भले ही लैंडर से हमारा संपर्क टूट गया है।

क्या कहा इसरो प्रमुख ने

इसरो प्रमुख सिवन ने आशंका जताई की यह हार्ड लैंडिग रही होगी। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ‘हार्ड लैंडिंग’ की वजह से ‘विक्रम’ मॉड्यूल को नुकसान पहुंचा या नहीं।

विक्रम लैंडर का पता चला

इसरो प्रमुख  के मुताबिक चंद्रयान 2 मिशन के लैंडर विक्रम का पता चल गया है। आर्बिटर ने थर्मल कैमरे से तस्वीर भी खीचीं है। हालांकि संपर्क अभी भी दोबारा से स्थापित नहीं हो पाया है लेकिन इससे दोबारा संचार स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।